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Definitional Dictionary of Surgical Terms (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Bouginage

बूजी-प्रवेसन, शलाका-प्रवेशन
मूत्रमार्ग, मलाशय आदि रचनाओं के विस्फारण के लिये बूजी या शलाका का प्रवेश करना।

Bow Leg (Tibia Varum)

धनुर्जंघा अन्तर्नत, अन्तर्जंघिका
इस रोग में रोगी की टांगे बाहर की तरफ मुड़ जाती हैं। ऐसी अवस्था में इसे अज्ञातहेतुक (idiopathic) कहा जाता है। रिकेट्स में भी कभी-कभी यह रोग देखने को लता है। हड्डियों के मुड़ने के कारण घुटनों तथा टखनों के जोड़ों (knee and ankle joint) को ठीक प्रकार से घुमाया नहीं जा सकता। अस्थि-संधि-शोथ (osteoarthritis) अर्थात् हड्डी और जोड़ में सूजन हो जाने की सम्भावना भी रहती है। इसके इलाज में टांगों के टेढ़ेपन से पैदा हुई विरूपता (deformity) को दूर किया जाता है।

Bow Man’S Capsule

सर्वमनस केपसूल
(1) कशेरुकी प्राणियों के युवा में स्थित वृक्क नलिका (Nephron) का प्रारंभिक दोहरी भित्ति वाला प्याले जैसा भाग। इस संपुट में एक कुंडलित केशिकागुच्छ होता (Glomerulus) है। ये दोनों मिलकर मैल्पीघी काय (Malpighian body) बनाते हैं। मैलपीजीयान काय गुर्दों के बाहरी (cortical) भाग में स्थित होते हैं। प्रत्येक संपुट की बाहरी परत (Parietal layer) मोटी तथा आंतरिक परत (Parietal layer) पतली व छिद्रिल कोशिकाओं (fenestrated cells) की बनी होती है। इस कोशिकाओं को पोडोसाइट्स कहते है क्योंकि इनके कोशिकीय प्रवर्ध (cellular appendanges) केशिकागुच्छ की केशिकाओं में छनित द्रव (Glomerular Filtrate) बिना किसी बाधा के वृक्क नलिका में प्रवेशित कर जाता है। ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस (Glomrulonephritis) नामक व्याधि में ये संपुट भी प्रभावित होते हैं।
(2) कशेरुकाधारी प्राणियों के वृक्क-नलिका का प्रारंभिक दोहरी भित्ति वाला फूला हुआ प्याले-जैसा भाग। प्रत्येक संपुट में एक कुंडलित केशिकागुच्छ (glomerulus) होता है। ये दोनों मिलकर मैलपीजी काय बनाते हैं। Malpighian body (मैलपीजी काय)।

Brain

मस्तिष्क
(1) प्राणियों में केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र का प्रमुख भाग, जो शिर में संवेदी अंगों में एकत्र होता है। यह शरीर की प्रतिक्रियाओं का विभिन्न प्रकार से समन्वय करता है।
(2) मस्तिष्क जीवों का विकास (Evolution) वास्तव में दिमाग का विकास ही है क्योंकि अमीबा से लेकर मानव तक के नियंत्रण तंत्र की तुलना करने पर सर्वाधिक विकास दिमाग का ही प्रतीत होता है। यह स्वाभाविक भी है क्योंकि जीव-संधर्ब (struggle of existence) द्वारा निर्धारित योग्यतम की उत्तरजीविता (Survival of the fittest) के लिये प्रयोग किये जाने दैनिक अंगों (Somatic body parts) यथा हाथ पैर, दांत, सींग आदि का नियंत्रण अंततः (ultimately) दिमाग के पास ही होता है। यह आश्चर्य की बात नहीं है कि जिस प्रकार (Metazoa) में कोशिकाओं के बीच-कार्य बंटवारा (Division of labour) होता है उसी प्रकार उच्च विकसित प्राणियों का मस्तिष्क भी अलग-अलग कार्य के लिये अलग-अलग विशेषीकृत भागों में बंटा होता है। मस्तिष्क की संरचनात्मक व कार्यात्मक जटिलता एक घनात्मक फीडबैक (Positive feedback) क्रिया समान प्रतीत होती है ज्यादा और ज्यादा चुनौतियां मिलने पर यह जटिल से जटिलता होता जाता है यह मानव पर भी लागू होता है और यही वजह कि मानवविज्ञानियों ने भविष्य के मानव की (Homeo-futuralis) ऐसी संकल्पना की है जिसमें हाथ पैर व धड़ की अवनति होगी किंतु सिर (या कपात) और बड़ा हो जायेगा। म्तिष्क केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (central nervous system) का प्रमुख भाग बनाता है तथा शरीर के कपालीय हिस्से में सुरक्षित व आवरित रहता है। मूलतः यटे ये संवेदी अंगों से संवेनाये एकत्र करता है तथा संवेदनाओं की प्रकृति व तीव्रता के अनुसार शरीर की दैहिक प्रतिक्रियाओं का विभिन्न प्रकार से नियंत्रण करता है। विकसित प्राणियों में संवेदना ग्रहण करने के लिये तथा नियंत्रण के लिये मस्तिष्क के निकटस्थ किंतु अलग भाग होते हैं। स्पष्ट है कि मस्तिष्क में विशेषीकृत संवेदनाओं से सीधे संबंधित कई भाग होते हैं व इसी प्रकार नियंत्रण वाले भी कई भाग होते हैं। भ्रिणिक (embrgologically) रूप से मस्तिष्क को निम्न भागों से मिलकर बना हुआ मानते हैं- अग्रमस्तिष्क (Prosencephalon or forebrain) मध्यमस्तिष्क (Mesencephalon or Mid brain) व अंत्यमस्तिष्क (Rhombencephalon or hind brain) अग्रमस्तिष्क स्वयं दो भागों को मिलकर बना होता है डायनसिफेलान (Diencephalon) व (Telencephalon) डायनसिफेलान के प्रमुख भाग थैलेमस व हाइपोथैलेमस (Thalamus & hypothalamus) हैं तथा टीलेनसिफेलान के दो प्रमस्तिष्क गोलार्द्ध (cerebral hemisphere) हैं। अंतमस्तिष्क भी दो भागों को मिलकर बना होता है- (Myelencephalon) और अनुमस्तिष्क (cerebellum) युवा मनुष्य के मस्तिष्क में लगभग (100 billion) तंत्रिका कोशिकायें (Neuron) होती हैं और यह शरीर के सबसे बड़े अंगों में से एक है। इसका भार लगभग 1300 ग्राम होता है। यह मशरुम के आकार का होता है और इसको सामान्य रूप से चार प्रमुख भागों से बना हुआ मान, सकते हैं- (Brain Stem), (Diencephalon)। प्रमस्तिष्क (cerebrum) व अनुमस्तिष्क (cerebellum)। ब्रेन-स्टेम स्वयं (Medulla oblongata Pons or Midbrain) से मिलकर बना होता है। डायसिफेलान ब्रेन-स्टेम के ऊपर होता है तथा इसके ऊपर प्रमस्तिष्क फैला होता है। प्रमस्तिष्क के नीचे व व्रेन-स्टेम के पीछे अनुमस्तिष्क होता है। जन्म के बाद, मस्तिष्क में होने वाली वृद्धि मुख्यतः कोशिकाओं के आकार में वृद्धि से व (Neuroglia) की संख्या व आकार वृद्धि से होती है। मस्तिष्क कपालीय स्थियों तथा मस्तिकीय झिल्लियों (Meninges) द्वारा सुरक्षित होता है। आंतरिक रूप से इसमें दो प्रमुख भाग होते है धूसर (Gray matter) जिसमें तंत्रिका कोशायों का प्रमुख भाग (cell body) होती हैं तथा श्वेत भाग (white matter) जिसमें कोशिकाओं के तंतुवीय भाग (Fibrillar Portion) रहता है जो तंत्रिकायें (Nerve) व (tracts) बनाता है। इन के श्वेत होने का कारण मायलिन का आवरण है।

Brai Abscess

मस्तिष्क-विद्रधि
मस्तिष्क में होने वाला विद्रधि।

Brain Oedema

मस्तिष्क-शोथ
मस्तिष्क में होने वाला शोथ।

Branchral Cyst

ब्रैकियल -पुटी
यह एक जन्मजात (congenital) पुटी है, जो दूसरे बैंकियल विदर (branchial cleft) से निंकलती है और 20 से 21 वर्ष की आयु में स्पष्ट हो जाती है, जबकि वह धीरे-धीरे बढ़ने लगती है। यह आमतौर पर निचले जबड़े (अधोहनु-mandible) के कोण के नीचे तथा पीछे की तरफ रहती है और उरोजत्रुक-कर्ण मूलिका पेशी (sternocleido mastoid muscle) के ऊपरी 1/3 भाग के सामने के किनारे (अग्र धारा) के नीचे से बाहर को निकली रहती है। इस पुटी में एक तरल होता है। जो यह यक्ष्म (T.B.) के पूय (pus-पीप) के सामने होता है, लेकिन इस तरल में कोलस्ट्रोल क्रिस्टल और उपकला ऊतक (epithelial cells) होते हैं। शस्त्रकर्म द्वारा इस पुटी को काटकर निकाल (उच्छेदन-excision) दिया जाता है, अन्यथा संक्रमण की संभावना होती है।

Branchial Fistula

व्रेंकियल नालव्रण
यह एक जन्मजात नालव्रण है, जो एक तरफ या दोनों तरफ (एक पार्श्विक या द्विपार्श्विक) हो सकता है और शायद लगातार रहने वाले दूसरे ब्रेंकियल विदर का स्थान ले सकता है: नालव्रण का बाहरी द्वार उरोजत्रुककर्णमूलिका (sternocleido mastoideus) पेशी की अग्रधारा के आस-पास होता है और यह अंधा-पथ (blind tract) ग्रसनी (pharynx) की पार्श्व-भित्ति तक फैला रहता है। कभी-कभी यह द्वारा ट्रोंसिली स्तम्भ के सामने के पृष्ठ पर मिलता है। रेडियो-अपार्य पदार्थ (radiopaque material) का इंजेक्शन देकर इस पथ को एक्स-रे के द्वारा देखा जा सकता है। रोगी श्लेज़्म आस्त्राव (mucous discharge) के लगातार निकलने की शिकायत करता है। कभी कभी ब्रैकियल पुटी के फट जाने (rupture) या संक्रमण (infection) के बाद ब्रैंकियल नालव्रण बन जाता है। इस रोग की चिकित्सा शस्त्रकर्म उच्छेदन (surgical excision) द्वारा की जाती है। यदि उच्छेदन पूरी तरह न हो तो इस नालव्रण के फिर से बन जाने की सम्भावना होती है।

Brawny Arm

दृढ़ीभूत बाहु
कक्षा-(Axilla) की लसीका नलिकाओं में रुकावट (कक्षा लसीका वाहिका अवरोध) की वजह से बाहु से मूजन का आ जाना। यह सूजन कभी-कभी स्तन के कैंसर के इलाज के बाद भी हो जाती है और फाइलेरिया रोग में भी होती हुई देखी गई है। इस रोग में संरक्षी चिकित्सा (Conservative treatment) से ही अधिकतम लाभ होता है।

Braxton-Hicks Contraction

ब्राक्सटन हिक्ससंकोच
गर्भावस्था में गर्भाशय का अनियमित वेदना रहित संकोच जो क्रमिक गर्भ-वृद्धि के साथ-साथ तीव्र और जल्दी जल्दी होने लगता है। जिसका माता को अनुभव होने लगता है परन्तु गर्भाशय मुख विस्तृत नहीं होता है।

Break Through Bleeding

कालपूर्व रक्तस्राव
समय के पूर्व होने वाला रक्तस्राव।

Breast Abscess

स्तन-विद्रधि
यह फोड़ा प्रायः दूध पिलाने वाली औरतों की छातियों में होता है। बीमारी के कीड़े आमतौर पर चूचुक (nipple) की चोट से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचते हैं। छातियों (स्तनों) में सूजन आ जाती है और बार-बार तेज बुखार हो जाता है। सूजन की वजह से दर्द होता है और बाद में दूसरी बीमारियों के चिह्र भी पैदा हो जाते हैं। स्तन-ऊतकों (tissues) में आगे चलकर और बीमारियां न हों, इसलिए जल्दी ही पीप को निकालना जरूरी है। यदि चिकित्सा ठीक तरह से न की जाए, तो फोड़ा पुराना बन जाता है और दूसरी तकलीफें पैदा कर सकता है।

Breast Bone

वक्ष-अस्थि/उरोस्थि
वक्ष में स्थिति अस्थि, जिसके दोनों ओर पार्शुका स्थित होती है।

Breatholyzer

श्वास वायु विश्लेषक
श्वास में निष्कासित वायु का विश्ळेषण करने वाला यंत्र।

Brittle Bones

भंगुर अस्थियाँ
एक परिवर्धी विकार, (developmental disorder) जिसमें हड्डियाँ बहुत अधिक भंगुर (टूटने वाली) होती जाती हैं। परिणामस्वरूप छोटी-छोटी चोटों के लगने से हड्डियाँ में बहुत से भंग हो जाते हैं, जिससे विरूपता हो जाती है। एक्स-रे में हड्डियाँ अस्थि सुज़िरता से ग्रस्त (osteoporosis), पतली तथा झुकी हुई दिखाई देती हैं।

Brodie’S Abscess

ब्रोडी विद्रधि
यह अस्थि मज्जा में कड़ी सी गुहा (sclerosed cavity) है, जो स्टेफिलोकॉक्स संक्रमण के बाद बनती है। आमतौर पर यह गुहा अन्तर्जंपास्थि (tibia) के ऊर्ध्वांत या ऊर्वस्थि के निम्नांत पर होती है। इसकी चिकित्सा आखुरण (curetage) है।

Bronchiectasis

श्वासनलिका विस्फार/श्वसनिका विस्फार
श्वासनलिका का विस्फारित जन्य विकार जिसमें विस्फारित प्रदेश में श्लेष्मा रुक जाता है एवं पूय के कारण पीत हरित एवं दुर्गन्ध युक्त हो जाता है। श्लेष्मा-निष्ठीवन बहुत कष्ट के साथ होत है।

Bronchiolitis

श्वसनीय-शोथ
श्वसनीय में पाये जाने वाला शोथ।

Bronchiospasm

श्वसनिका-संकोच
श्वसन-नलिका में संकोच, जिसके कारण रोगी को उच्छवास में बहुत कठिनाई होती है।

Bronchoesophagoscopy

श्वासान्ननलिका-वीक्षण-यंत्र
श्वासनलियों एवं ग्रास-नली का यन्त्र द्वारा परीक्षण।

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