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Definitional Dictionary of Surgical Terms (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Epidermis

बाह्यत्वचा
प्राणियों के शरीर में त्वचा की बाहरी रक्षात्मक परत, जो भ्रूण के बाह्य चर्म या अधिकोरक से बनती है।

Epididymis

अधिवृषण
शुक्रवाहनी की लंबी कुंडलित नलिकाकार संरचना। उच्चतर कशेरुकिओं (vertebrates) में यह वृषण और शुक्रवाहक के बीच स्थित होती है। स्तनधारियों में इसके दो भाग हो जाते हैं। शीर्ष (Caput) और पुच्छ (Cauda)

Epididymovasostomy

अधिवृषण शुक्रवाहिका सम्मिलन
अधिवृषण (epididymis) तथा शुक्रवाहिक (Vas deferens) के दूरस्थ भाग के बीच शस्त्रकर्म द्वारा संचार व्यवस्था बनाना। यह ञपरेशन पुरुष बंध्यता (male sterility) की चिकित्सा करने तथा कभी-कभी शुक्रवाहिका उच्छेदित व्यक्तियों में शुक्रवाहिका तथा अधिवृषण के बीच फिर से संचार-व्यवस्था बनाने के लिये किया जाता है।

Epipharynx

अधिग्रसनी
एक महपालि जो कभी-कभी ऊर्ध्वोष्ठ या मुखपालि के पश्च (या अधर) पृष्ठ पर होती है।

Epispadias

अधिमूत्रमार्गता
एक जन्मजात दोष जिसमें पुरुष के मूत्रनली (मूत्रपथ) शिश्न के अभिपृष्ठ भाग (dorsal part) में थोड़े या पूरे तरीके से खुली होती है। अक्सर यह खराबी मूत्राशय की अग्र भिति तथा पेट के निचले हिस्से (निम्न उदर) के बन्द न होने की खराबी के साथ पायी जाती है। इस विकार को ऑपरेशन के जरिये ठीक किया जाता है।

Epithelial Cell

उपकला-कोशिका
शरीर की बाह्य एवं आंतरिक सतहों के आवरण, ग्रंथियों और संवेदांगों के भागों का निर्माण करने वाली स्तराधानित कोशिकांए जिनकी आसन्न झिल्लियों के बीच बंधकाय होते हैं। इनका एक पृष्ठ मुक्त तथा दूसरा आधार झिल्ली पर टिका हुआ रहता है।

Epithelioma

उपकलार्बुद
पट्ट की कोशिका कार्सिनोमा (squamous cell carcinoma) । यह त्वचा में पहले से ही मौजूद कैंसर-पूर्व विक्षति में बन सकता है। लाक्षणिक तौर पर यह एक व्रण (घाव) है जिसके किनारे उलटे हुए (बहुर्वर्तित) होते हैं तथा इकी भूमि (floor) में अस्वस्थ मृत-ऊतक (unhealthy slough) पाये जाते हैं। इसका आधार (base) कठोर या दृढ़ीभूत (indurated) होता है तथा यह बाद में गभीर रचनाओं से चिपक जाता है। यह क्षेत्रीय लसीका पर्वों में फैलता है। चिकित्सा विस्तृत उच्छेदन द्वारा की है। इसके साथ त्वचा निरोपण (skin grafting) किया भी जाता है और नहीं भी।

Epulis

पुप्पुट
मसूड़े (gum) पर एक कठोर सी शोथ। यह सूजन चार तरह की होती है- (1) कणिकामय (granular), (2) रेशायम (fibrous), (3) महाकोशिकामय (gaint celled) और (4) कभी कभी कार्सिनोमाजन्य काणिकामय पुप्पुट। दन्त क्षरण (carries of the tooth) के चारों तरफ कणिकामय ऊतक का एक पुंज उपस्थित होता है या यह पुप्पुट मसूड़े के क्षोभित भाग पर मिलता है। दांत को बाहर निकाल देना और कणिकामय पुंज को खुरजच (आखुरण- scrapping) देना इस रोग की चिकित्सा है। इन चारों प्रकारों में तन्तुमय पुप्पुट सामानय है और इसमें मसूड़े के नीचे एक परा तन्तु-अर्बुद (fibroma) होता है। इस की चिकित्सा में आस पास के दांतों को निकाल देना, ग्रसित समूड़े के हिस्से के साथ साथ हड्डी का कीलाकर उच्छेदन (wedge resection) कर देना शामिल है। महाकोशिकामय पुप्पुट एक अस्थि-अवशोषी-कोशिकार्बुद (osteoclastoma) है।

Erythroblastoma

लोहितकोशिकाप्रसू-अर्बुद
केन्त्रक-युक्त (nucleated) लोहित रक्त कणिकाओं (red blood corpuscles) से युक्त तथा अर्बुद के समान कोई पिंड या पुंज।

Erythrocyte

रक्ताणु
कशेरुकिओं की चपटी बिंब-जैसी गोल कोशिका जो हीमोग्लोबिन वर्णक की उपस्थिति के कारण लाल होती है। हीमोग्लोबिन की सहायता से यह शरीर के विभिन्न भागों में आक्सीजन पहुँचाती है और वहाँ से कार्बन डाइआक्साइड ले लेती है। केवल स्तनपायियों में ये केन्द्रक विहीन होते हैं।

Esmarch’S Bandage

एस्मार्क पट्टी
रबड़ की ऐसी जिसके पट्ट दाब के द्वारा, एकत्रित रक्त को खींच करके काला जाता है।

Eustachian Tube

युस्टेकी नलिका
स्थलीय कशेरूकियों में छोटी पतली युग्मित नली, जो कर्णपटह गुहा को ग्रसनी से जोड़ती है। इसका कार्य झिल्ली से भीतर और बाहर हवा के दबाव को बराबर बनाए रखना है।

Excretory System

उत्सर्जनतंत्र
उन सभी संरचनाओं और अंगों का समुच्चय, जो शरीर से वर्ज्य पदार्थ को बाहर निकालने में योगदान करते हैं।

Exercise Bone

वयायामय अस्थि
अति व्यायाम जन्य अस्थि वृद्धि।

Exomphalos

नाभिनाल हर्निया/नाभिनाल आंत्रवृद्धि
यह एक जन्मजात (extra-embryonic cavity) अवस्था जिसमें बहिर्भ्रूणीय गुहा (extra-embryonic cavity) से आंत (gut) देहगुहा गुहा (coelomic cavity) में वापस नहीं जाती। यह हर्निया दो प्रकार का होता है (1) लघु प्रकार (2) बृहत् प्रकार। लघु प्रकार में नाभि नाल (umbilical cord) कोश के बीच में चिपका रहता है जबकि बृहत् प्रकार में नाभिनाल कोश के सबसे निचले हिस्से में चिपका रहता है तथा पेट के सामने की दीवाल (अग्र उदर भित्ति – anterior abdominal wall ) नहीं होती। बृहत् प्रकार की अन्तर्वस्तुओं (contents) में छोटी आंत, बड़ी, आंत, और प्रायः (यकृत्) होते हैं। इस रोग की चिकित्सा शस्त्रकर्म द्वारा की जाती है। यदि बृहत् प्रकार के नाभिनाल हर्निया का उपचार शीघ्र न किया जाये तो यह रोग घातक (fatal) भी हो सकता है।

Expiration

निःश्वसन
श्वसन अंगों अर्थात फुफ्फुस से वायु का बाहर निकलना।

Exploratory Puncture

अन्वेषी वेधन
निदान के लिए किसी गुहा (cavity) अथवा अर्बुद का भेदन या वेधन करना।

Extraction

समूलोच्छेदन
किसी अंग या उसके भाग को पूर्ण रूप से निकाल देना।

Extroversion

बहुमुखता
अनेक मुखों का होना।

Ectopic Testes

अस्थानिक वृषणता
वृषण के ठीक से नीचे न उतरने की वजह से उसका दूसरी जगह पर उतर जाना। इसका इलाज ऑपरेशन करके इसे अपनी जगह पर ला देना है।

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