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Definitional Dictionary of Surgical Terms (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Humerus Fracture

प्रगण्डास्थिभग्न
बाहु स्थित प्रगण्डास्थि में आघातिक कारण से उत्पन्न होने वाला भग्न।

Hunner’S Ulcer

हनर व्रण
एक वशिष्ट प्रकार का चिरकारी मूत्राशय शोथ (chronic cystitis) जो प्रौढ़ावस्था की औरतों में देखने को मिलता है। इस स्रियों में मूत्राशय बुध्न (fundus of the bladder) की श्लैष्मिक कला (mucous membrane) में ताराकार व्रण (stellate shaped ulcer) बन जाता है। तीव्र वेदना, बार-बार मूत्र का आना, मूत्र करने में तकलीफ होना तथा रक्तमेह, अर्थात् पेशाब या मूत्र में रक्त का आना, इस रोग की विशेषताएं हैं। चिकित्सा में डायाथर्मी, दहनकर्म (cauterization) या शस्त्रकर्म द्वारा उच्छेदन कर दिया जाता है।

Hutchinson’S Melanotic Freckle

हचिंसन मैलेनिक त्वक् विवर्णता
धूप में अनावृत होने के फलस्वरूप मैलनिन के इकट्ठा हो जाने से त्वचा पर बना धब्बा।

Hydatid Cyst

हाइडेटिड पुटी
यह मनुष्य में, जो कि मध्यस्थ पोषद (intermediate host) है, टीनिया एकीनोकोक्स के कारण होती है। इसमें भूरापन लिए एक सफेद कला (झिल्ली – membrane) होती है। इस कला को स्तरित कला (laminated membrane) कहते हैं, जो अंकुरित अपकला (germinated epithelium) द्वारा अन्दर की तरफ स्तरित (अस्तर लगाये) है। यह अधिकतर यकृत् (liver) में देखी जाती है परनतु यदि स्कोलेक्स यकृत् के द्वारा छनकर फेफड़ों में पहुंच जाए तो शरीर के किसी भी हिस्से में देखी जा सकती है। यह अवस्था बिना किसी लक्षण के मिलती है तथा मरणोत्तर (post mortem) परीक्षा करने पर इसका पता चलता है चा दक्षिण अधः पर्शुक प्रदेश (पसलियों के नीचे सीधी तरफ (hypochondrium) में बिना दर्द किए पुटीमय सूजन देखी जा सकती है। पुटी के फट जाने पर अधिक प्रोटीन से मुक्त तरल पर्युदर्या गुहा (peritoneal cavity) में चला जाता है जिससे ऐनाफिलेक्टिक स्तब्धता (anaphylactic shock) उत्पन्न हो जाती है। पुटी में छोटी-छोटी पुटियां बनती जाती हैं, जिन्हें अनुजात पुटियां (daughter cysts) कहते हैं। इसकी चिकित्सा ऑपरेशन करके पुटी निकाल देना है।

Hydradenitis Suppurativa

पूययुक्त स्वेद ग्रंथिशोथ
इसमें स्वेद ग्रंथि में संक्रमण के कारण पूययुक्त शोथ उत्पन्न हो जाता है यह मुखअयतः कक्षा में मिलता है।

Hydrencephaly

अमस्तिषअकी-जलशीर्ष
प्रमस्तिष्क गोलार्धों (cerebral hemispheres) की जन्मजात अनुपस्थिति के साथ-साथ रिक्त अवकाश (empty space) में प्रमस्तिषक-मेरु द्रव या तरल (cerebrospinal fluid) की उपस्थिति का होना।

Hydrocele

जलवृषण
अंडधर कंचुक (tunica vaginalis) या आच्छादी प्रवर्ध (processus vaginalis) में जल का इकट्ठा हो जाना। इसका कारण अज्ञात है। लेकिन यह बीमारी श्लीपद (फाइलेरिया), वृषण या अधिवृषण की बीमारी के साथ-साथ हो सकती है। इस बीमारी का इलाज ऑपरेशन के जरिए किया जाता है। इलाज में यह भी देखा जाता हैं कि तरल पदार्थ किस स्थान पर इकट्ठा हुआ है और इसका संबंध पर्युदया गुहा (peritoneal cavity) से तो नहीं है। जलवृषण का वर्गीकरण (classification) भी किया जा सकता है। यदि तरल सिर्फ वृषण गुहा में ही है तो अंडधर जलवृषण (vaginal hydrocele) कहा जाता है। यदि पर्युदर्यागुहा के साथ वृषणरज्जु प्रवर्ध खुल जाय (patency) अर्थात् वृषण रज्जु (spermatic cord) के अंडधर कंचुक का पर्युदर्या गुहा से संबंध हो तो ऐसी अवस्था को जन्मजात जलवृषण (congential hydrocele) कहा जाता है। शिशु जलवृषण (infantile hydrocele) में अंडधर कंचुक (tunica vaginalis) तथा आच्छादी प्रवर्ध (processus vaginalis) दोनों में ही तरल मिलता है ओर उनका संचार या संबंध पर्युदर्या गुहा से नहीं होता।

Hydrocephalus

जलशीर्ष
प्रमस्तिष्क में द्रव (C.S.F) के सामान्य परिसंचरण में रुकावट आ जाने से उसका मस्तिष्क के अवाजालतानिक अवकाश में इकट्ठा हो जाना। यह अवस्था जन्मजात (congenital) या बाद में अर्जित (acquired) भी हो सकती है। यह अवस्था असंचारी (non-communicating type) समझी जाती है जो की इस रोग का मुख्य लक्षण दिखाई पड़ता है। चतुर्थ निलय के छेद के बन्द हो जाने के कारण निलय तंत्र (ventricular system) रुक सा जाता है। यदि विस्फारित निलय का अवजालतानिका अवकाश से खुल कर संचार होता हो तब जलशीर्ष को संचारी प्रकार (communicating) कह सकते हैं। लाक्षणिक रूप से शिर बड़ा हो जाता है और शिरोवल्क की शिराएँ चौड़ी हो जाती हैं तथा फौन्टेनलियां विस्तृत हो जाती हैं। प्रेरक (motor) क्षेत्र के ग्रसित होने पर कोई लक्षण नहीं मिलते। रोगी की सोचने-समझने की शक्ति में भी कमी नहीं आती। पीयूषिका ग्रन्थि (pituitary gland) पर दबाव पड़ने की वजह से द्वितीयक अन्तःस्रावी लक्षण (secondary endocrine symptoms) बढ़ने लगते हैं। जलशीर्ष के रोधी प्रकार (obstructive type) में रुकावट लाने वाले कारक (agent) जैसे अर्बुद (tumour) को हटाया जा सकता है।

Hydronephrosis

जलवृक्कता
वृक्क गोणिका (renal pelvis) का अपूतित विस्फार (aseptic dilation)। यह आगे चल कर वृक्क ऊतक में शोष (atrophy) उत्पन्न करता है। इसका कारण वृक्क से मूत्र के बहाव में अल्प या अधिक रुकावट (obstruction) होना है। रोगी की आरम्भिक अवस्था में रुकावट के कारण को दूर करना आवश्यक है। देर से आने वाले रोगियों में ऑपरेशन करके एक वृक्क को निकाल देना पड़ता है, पशर्ते दूसरा वृक्क ठीक काम कर रहा हो।

Hydropneumothorax

जलवातवक्ष
परिफुप्फुस गुहा (pleural cavity) में तरल एवं वायु का इकट्ठा हो जाना।

Hydroureter

जल-गवीनी
गवीनी की अवकाशिका (lumen) में या मूत्राशय ग्रीवा तथा मूत्रमार्ग (urethra) में रुकावट के कारण गवीनी का फैल जाना (dilation)। जल-गवीनी के साथ-साथ आमतौर पर जल-गोणिका (hydropelvis) तथा जल आलवाल (Hydrocalyces) की हालत भी पाई जाती है। कभी कभी मूत्राशय से मूत्र वापस गवीनी में जाने से भी यह अवस्था पैदा हो सकती है। चिकित्सा कारण के अनुसार की जानी चाहिए।

Hygroma Cystic

लसपुटी अर्बुद
एक कोश, पुटी अथवा श्रेल्मपुटी जिसमें तरल भरा होता है।

Hydatid Disease

हाइडेटिड रोग
फीताकृमि (एकिनोकोकस ग्रेन्य़ूलोलस) के लावो की पुटीयों (Cyst) की अधिकता से यकृत में निर्मित पुटीजन्य रोग।

Hyoid Bone

कण्ठिकास्थि
जिह्वा के आधार पर स्थित घोडे के नाल या अंग्रेजी U आकृति के आकार की अस्थि।

Hypercalcaemia

अतिकैल्शियमरक्तता
रक्त में कैल्शियम का अधिक हो जाना।

Hypercorticism

हाइपरकार्टिसिज्म
एड्रीनल ग्रंथि के कॉर्टेक्स से अत्यधिक हारमोन की उत्पत्ति।

Hypernatraemia

अतिसोडियमरक्तता
रक्त में अधिक सोडियम का हो जाना।

Hypernephroma

हारपरनेफ्रोमा
वृक्क का एक अर्बुद जिसकी रचना एड्रीनल ग्रंथि के कार्टेक्स से मिलती है।

Hyperparathyroidism

अतिपरावटुवता
परावटु ग्रंथियाँ (पैराथॉइरोयड ग्रंथियों) की अत्यधिक सक्रीयता के कारण होने वाला रोग।

Hyperplasia

अतिविकसन
शरीर के किसी अंग अथवा भाग की कोशिकाओँ की संख्या में वृद्धि होने के कारण उस अंग के आकार में अतिवृद्धि।

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