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Definitional Dictionary of Surgical Terms (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Thomas Bed Knee Splint

थोमस शय्या जानु स्प्लिंट
सम्पूर्ण निम्न शाखा (lower extrinities) की विकृति में काम में लाया जाने वाला स्प्लिंट।

Thoracopagus

बद्धवक्ष्यमल
यह द्विगर्भ राक्षस (double foetal monster) है जिसमें दो लगभग पूर्ण बच्चे उरोस्थि क्षेत्र (sternal regions) में या उसके पास-पास जुड़े होते हैं, और इस प्रकार, दोनों ही एक दूसरे की तरफ ह किये होते हैं।

Thoracoplasty

वक्षसंधान
रोग ग्रस्त फुप्फुस (फेफड़े) को आंशिक पात (partial collapse) की अवस्था में लाने के लिये अर्थात् उसके काम करने की ताकत में कमी करने के लिये ऑपरेशन द्वारा पशुकाओं (पसलियों) को काटकर निकाल देना। इससे फुप्फुस-आवरण अवकाश (pleural space) का अपचयन (reduction) अथवा कमी हो जाती है।

Thoracoplurecotmy

वक्ष-परिफुप्फुसउच्छेदन
एक शस्त्रकर्म जिसमें वक्षसंधान (thoracoplasty) एवं परिफुप्फुसउच्छेदन (pleurectomy) सम्मिलित हैं। यह शस्त्रकर्म प्रायः फुप्फुस यक्ष्मा की चिकित्सा में किया जाता है।

Thoracoscopy

वक्षदर्शन
परिफुप्फुस अवकाश (pleural space) का निरीक्षण करना। यह निरीक्षण वक्षभित्ति में छोटा सा छेदन कर उसके चरिए वक्ष दर्शी (thoracoscope) डालकर किया जाता है।

Thoracotomy

वक्षछेदन
रोग ग्रस्त अंग (diseased organ) के बारे में अन्वेषण (exploration), उसके निकास (drainage) या उसे अलग करने या निकालने के लिये शस्त्रकर्म द्वारा वक्ष भित्ति (chest wall) को खोलना।

Thorax

वक्ष
उच्चतर कशेरूकियों में ग्रीवा और उदर के बीच का भाग जिसके अंदर हृदय फेफड़े आदि सुरक्षित रहते है।

Threatened Abortion

सम्भावित गर्भपात
अकाल गर्भपात के लक्षणों का उत्पन्न होना। इसमें गर्भ के प्रथम 20 सप्ताह में गर्भपात की सम्भावना रहती है।

Thrombectomy

घनास्त्र-उच्छेदन
रक्तवाहिका से घनास्त्र (thrombus) को काट कर निकाल देना।

Thrombo-Angitis Obliterans Or Burger’S Disease

रोधक घनास्त्र वाहिकाशोथ या बर्जर रोग
यह रक्त वाहिकाओं की अविशिष्ट (nonspecific) शोथज (inflammatory) खंडांशी (segmental) तथा रोधज (obstructive) बीमारी है। आमतौर पर इस बीमारी का असर शरीर की निम्न शाखा (पैरों) पर पड़ता है। यह ज्यादातर सिगरेट, बीड़ी या हुक्का पीने वालो में देखने को मिलती है। शरीर की किसी दूसरी रक्त की नालियों (वाहिकाओं) को यह विरले ही प्रभावित करती है। चलने फिरने में जंघपिंड (पिंडलियों) की पेशियों में ऐंठन के साथ दर्द होता है जिसे सविरामी खंजता (intermitant claudication)- रुक-रुक कर लंगड़ापन) कहते हैं। शुष्क कोथ (dry gangrene) के कारण पैरों की अंगुलियों या पैर को हानि होने की संभावना हो सकती है। दवाइयों के जरिये रक्त के बहाव (रक्त परिसंचार) में सुधार और कोथी भाग का उच्छेदन कर देना इसका इलाज है।

Thromboend-Artherectomy

अन्तर्धमनी धनास्त्र उच्छेदन
एक शस्त्रकर्म जिसमें धमनी के रोगग्रस्त अन्दरूनी अस्तर (inner lining) को घनास्त्र (यदि हो) के साथ ही काट कर निकाल दिया जाता है।

Thrombophlebitis

घनास्त्रशिरा शोथ
शिरा की शोथज अवस्था जिससे बाद में आमतौर पर घनास्रता (thrombosis) हो जाती है।

Thrombosis

घनास्रता
रक्त की नलियों और हृदय (हृद् वाहिका तंत्र) में किसी भी जगह रक्त का एक थक्का सा बन जाना। इस बीमारी का कारण है रक्त की नलियों की दिवाल में चोट लग जाना, सूजन (शोथ) आ जाना या व्यपजनन (degeneration) होना, आतंचनता, (coagulability) अर्थात् रक्त का रुझान जमने की तरफ अधिक हो जाना या रक्त के बहाव (flow of blood) का कम हो जाना। शल्य चिकित्सा के मामलों में आमतौर पर यह घनास्रता टांग की रक्त की नलियों (वाहिकाओं) में देखने को मिलती है। कभी-कभी आंत्रयोजनी वाहिकाओं (mesenteric vessels) में भी ऐसी दशा देखी जाती है।

Thymectomy

थाइमसोच्छेदन
शस्त्रकर्म द्वारा (थाइमस) बाल ग्रैवेयिक को काटकर निकाल देना।

Thymoma

थाइमस-अर्बुद
एक अर्बुद जो (थाइमस) बाल ग्रैवेयिक की उपकला से उत्पन्न होता है।

Thyro-Glossal Fistula

अवटु-जिह्वा नालव्रण
एक अर्जित अवस्था (acquired condition) जो अवटु-जिहवा पुटी (thyro-glassal cyst) के पूरी तरह से न निकलने के कारण उत्पन्न होती है। विशिष्ट लक्षणों में इसके द्वार के ऊपरी भाग में एक त्वचा का छज्जा (hood) होता है जो नीचे की तरफ दबा होता है और जिससे श्लेष्मा का आस्राव होता है। इसकी चिकित्सा में नालव्रण होता है। इसमें बार-बार शोथ हो जाना आम बात है। इसकी चिकित्सा में नालव्रण का पूरी तरह से उच्छेदन (excision) करना होता है जिसमें कंठिकास्थि (hyoid bone) के एक हिस्से को भी काट कर निकाल देना पड़ता है।

Thyroiditis

अवटुशोथ
अवटु ग्रन्थि की शोथज अवस्था। यह विशिष्ट (specific) अथवा अविश्ट (non-specific) हो सकती है। अवटु ग्रन्थि विसरित रूप से (diffusely) स्थिर एवं सख्त होती है और इसके साथ ही अवटु अल्पक्रियता (hypothyroidism) के लक्षण भी हो सकते हैं। यह अवस्था अवटु ग्रन्थि के कार्सिनोमा से मेल खाती है। निदान निश्चित हो जाने के बाद इस रोग की चिकित्सा लक्षणानुसार (symptomatic) की जाती है। ऑपरेशन निदान को स्थापित (setting) करने या दाब प्रभावों (pressure effects) को दूर करने के लिये किया जाता है।

Thyrotoxicosis

अवटु-विषाक्तता
अवटु ग्रन्थि की बढ़ी हुई सक्रियता (activity) के कारण उत्पन्न एक क्लिनिकल अवस्था (clinical condition) है। इस रोग के लक्षणों में हृदय दर (heart rate) का बढ़ा होना, आंखों का बाहर को निकला होना (protruding eyes), वजन में कमी, पसीना आनास, अत्यधिक भूख का लगना (excessive appetite) तथा आम बेचैनी (gneral restlessness) शामिल हैं। अवटु ग्रन्थि बढ़ भी सकती है और उसमें बढ़ी हुई वाहिकामयता (increased vascularity) पाई जा सकती है। इस रोग की चिकित्सा मं प्रति-अवटु औषधियां यथा- (radioisotopes) तथा ऑपरेशन शामिल हैं।

Tongue Tie

जिह्वा-बद्धता
बच्चे की जिह्वा का मुखगुहा से बाहर न निकल पाना। यह जिह्वा फ्रीनम (जिह्वा सेवनी) के छोटे होने के कारण उत्पन्न होती है। शस्त्रकरम द्वारा फीनम को काट देने से जिह्वा सामान्य रूप से बाहर आने लगती है। कभी-कभी इस अवस्था के कारण रोगियों की बोली में भी विकार हो जाता है।

Tonsillar Abscess

गलतुण्डिका विद्रधि
गल तुण्डिका परिक्षेत्र में (tonsillar area) तीव्र वेदना, जो कर्ण एं ग्रीवा प्रदेश तक विस्तरित होता है।

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