भारतीय भाषाओं द्वारा ज्ञान

Knowledge through Indian Languages

Dictionary

Definitional Dictionary of Metallurgy (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

A B C D E F G H I J K L M N O P Q R S T U V W X Y Z

Aluminothermic process

ऐलुमिनो ऊष्मिक प्रक्रम
देखिए– Metallothermic process के अंतर्गत

Alundum

एलंडम
क्षारकीय उच्चतापसह पदार्थ जिसे प्राकृतिक ऐलुमिनियम ऑक्साइड (बॉक्साइट) को विद्युत भट्टी में संगलित कर बनाया जाता है। अपद्रव्यों को निःसादन (Settling) द्वारा पृथक कर दिया जाता है और उत्पाद को मृतिका तथा फेल्सपार के साथ पीसकर, 1500°C पर जलाया जाता है। इसका प्रयोग उच्च तापसह सीमेन्ट तथा अपघर्षी के रूप में किया जाता है।

Alzak process

ऐल्जक प्रक्रम
ऐलुमिनियम परावर्तकों को बनाने की विधि। इसमें पृष्ठ विशेष को चमकाने के लिए उसकी किसी अम्ल विद्युत-अपघट्य, सामान्यतया फ्लुओबोरिक अम्ल के साथ क्रिया की जाती है और फिर उसे गरम क्षारीय विलयन में डुबोया जाता है। अंत में ऐलुमिनियम ऑक्साइड की पारदर्शक संरक्षी परत उत्पन्न करने के लिए उसका ऐनेडीकरण किया जाता है।

Amalgamation process

पारदन प्रक्रम
स्वर्ण और रजत को उनके अयस्कों से निष्कर्षित करने की एक विधि। पहले अयस्क के बॉल मिल में पानी के साथ पीसकर लुगदी बनाई जाती है। तत्पश्चात् इस चूर्णित अयस्क की लुगदी को पारद या पारदित ताम्र प्लेटों के ऊपर से बहाया जाता है। अयस्क के बड़े कण पारे के साथ अमलगमित हो जाते हैं जिन्हें थोड़े-थोड़े समय बाद प्लेटों से खुरचकर निकाल दिया जाता है। इस खुरचन से पारे को आसवन द्वारा पृथक कर दिया जाता है जिससे स्वर्ण और रजत रिटॉर्ट में रह जाते हैं। इस प्रक्रम के पश्चात् अयस्क लुगदी में थोड़ा स्वर्ण रह जाता है जिसका निष्कर्षण सायनाइड प्रक्रम द्वारा किया जाता है।

American gold

अमरीकी स्वर्ण
एक स्वर्ण-ताम्र मिश्रातु जिसमें 10% तांबा होता है। अमेरिका में इसका उपयोग सिक्कों के निर्माण में किया जाता है।

Anatomical alloys

शारीरीय मिश्रातु
कम गलनांक (60°C) वाला मिश्रातु जिसमें 19% वंग, 17% सीसा, 53.5% बिस्मथ और 10.5% पारा होता है। इसका उपयोग शारीरीय मॉडलों को बनाने में किया जाता है।

Angle of bite

दंश-कोण
धातुओं के बेल्लन में, जहाँ संपूर्ण बल बेलनों के माध्यम से प्रेषित किया जाता है, पहले संस्पर्श पर, बेलन त्रिज्या और बेलन केंद्रों के मध्य बनने वाला अधिकतम कोण, दंश-कोण कहलाता है।

Angle of contact

संपर्क कोण
साम्यावस्था में परस्पर संपर्क करने वाली दो प्रावस्थाओं के मध्य बनने वाला कोण।

Angle of nip

अभिग्राह कोण
बेल्लन, हनु अथवा परिभ्रामी संदलन में कार्यकारी-पृष्ठों के बीच दो स्वर्श-बिंदुओं पर स्पर्श रेखाओं द्वारा बनाया जाने वाला प्रवेश-कोण। यदि प्रचालन-कोण कम हो तो उसे स्पर्श कोण या बेल्लन कोण (Rolling angle) कहते हैं।

Angle of repose

विश्राम-कोण
जब दलित द्रव्य एक ढेर के रूप में होता है तो उस द्रव्य के नत पृष्ठ का (आधार पर) क्षैतिज के साथ बना कोण, विश्राम-कोण कहलाता है।

Anglesite

ऐंग्लीसाइट
लेड सल्फेट (PbSO4), जो विषमलंवाक्ष क्रिस्टलों के रूप में पाया जाता है। यह गैलेना के साथ मिलता है और गैलेना के अपघटन से प्राप्त होता है। यह बहुमूल्य अयस्क है। कठोरता 2.5-3 तथा विशिष्ट घनत्व 6.3।

Anisotropy

विषमदैशिकता
वह गुणधर्म जिसके कारण किसी पदार्थ के अभिलक्षणों के विभन्न क्रिस्टलीय दिशाओं में भिन्न भिन्न मान होते हैं।

Annealing

अनीलन
ठोस पदार्थों, विशेषतः काँच और धातुओं के लिए प्रयुक्त एक ऊष्मा-उपचार प्रक्रम। इसमें धातु को कुछ समय तक अनीलन-ताप पर बनाए रखने के बाद धीरे-धीरे ठंडा किया जाता है। अनीलन ताप और शीतलन-दर प्रयुक्त पदार्थ विशेष पर और उस प्रयोजन पर निर्भर करता है जिसके लिए उसका प्रयोग किया जाना है। प्रयोजन निम्न हो सकते हैं– (1) पदार्थ में मृदुता उत्पन्न करना (2) संचकन अथवा पूर्व ऊष्मा-उपचार से उत्पन्न आंतरिक प्रतिबलों को दूर करना (3) क्रिस्टल-संरचना का परिष्करण (4) तन्यता, चर्मलता, विद्युत या चुंबकीय आदि भौतिक गुणधर्मों में सुधार करना (5) धुली गैसों को पृथक करना (6) निश्चित सूक्ष्म संरचना उत्पन्न करना।

कृष्ण अनीलन (Black annealing)– (1) चादरों या धातु की अन्य वस्तुओं के अनीलन की विधि जिसके परिणामस्वरूप विवर्णन के साथ साथ पपड़ी निकल आती है। ऐसी वस्तुओं का उपयोग केवल तब होता है जब विवर्णन और पपड़ी का निकलना हानिकारक न हो। (2) लोह मूलक मिश्रातु की चादरों के पेटी अनीलन की विधि जो तप्त बेल्लन, कर्तन और अम्लोपचार के बाद की जाती है। यदि इस क्रिया को ठीक ढंग से किया जाए तो वस्तु काली नहीं पड़ती है।
पेटी अनीलन (Box annealing)– (1) अनीलन की एक विधि जिसे धातु के बंद पात्र में, पैकिंग पदार्थ के साथ या उसके बिना, संपन्न किया जाता है ताकि उत्पाद का ऑक्सीजन न हो। इसमें घान को रूपांतरण ताप-परास के अंदर या कभी कभी कुछ अधिक ताप तक गरम करने के बाद ठंडा किया जाता है। (2) तप्त फोर्जनों को फोर्जन प्रक्रिया के बाद सीधे बंद पात्र में रखकर धीरे-धीरे ठंडा करना जिससे फोर्जन विकृतियाँ कम हों। इसे संवृत अनीलन और पात्र अनीलन भी कहते है।
दीप्त अनीलन (Bright annealing)– अनीलन की एक क्रिया जिसे भ्राष्ट्र के नियंत्रित वायुमंडल में संपन्न किया जाता है ताकि उत्पाद के पृष्ठ का कम से कम ऑक्सीकरण हो। इससे पृष्ठ अपेक्षाकृत चमकीला रहता है। इसे श्वेत अनीलन भी कहते हैं।

ज्वाला अनीलन (Flame annealing)– अनीलन प्रक्रम जिसमें लोह मूलक मिश्रातु का पृष्ठ, सुनियंत्रित उच्च ताप टार्च की ज्वाला से प्राप्त ऊष्मा द्वारा मृदु किया जाता है।

पूर्ण अनीलन (Full annealing)– एक मृदुकरण प्रक्रम जिसमें किसी लोह मूलक मिश्रातु को रूपांतरण ताप-परास से अधिक ताप तक गरम किया जाता है। इस ताप पर निश्चित समय तक रखने के बाद उसे धीरे-धीरे रूपांतरण ताप परास से कम ताप तक पूर्व निर्धारित दर से ठंडा किया जाता है। वस्तुओं को धीरे-धीरे स्वयं भट्टी में अथवा ऐसे माध्यम में ठंडा किया जाता है जिसमें वे मंद गति से ठंडी हो सकें। ठंडा होने की दर जितनी कम होगी मिश्रातु की कठोरता भी उतनी ही कम होगी।
माध्यमिक अनीलन (Intermediate annealing)– अंतिम परिष्कृति से पहले अनेक अतप्त-अभिरूपण (Cold forming) और परिष्करण क्रियाओं के बीच अर्ध-तैयार, अतप्त-पिटवाँ-धातु के उत्पादों का अनीलन करना। यह अतप्त-कर्मण के प्रभावों को समाप्त करने और फलस्वरूप अनुवर्ती परिष्करण क्रिया को संपन्न करने के लिए किया जाता है।
समतापि अनीलन (Isothermal annealing)– किसी फरेस मिश्रातु का ऑस्टेनाइटन करने के बाद उसे किसी ऐसे ताप तक ठंडा कर उस ताप पर बनाए रखना जिस पर ऑस्टेनाइट अपेक्षाकृत मृदु फोराइट-कार्बाइड (पर्लाइट) समुच्च्य में परिवर्तित हो जाता है।
प्रक्रम अनीलन (Process annealing)– एक प्रक्रम जिसमें प्रायः चादर या तार रूप में विद्यमान लोह मूलक मिश्रातु को रूपांतरण ताप परास की निचली सीमा से कुछ कम ताप तक गरम करने के बाद ठंडा किया जाता है। इस प्रक्रम का उपयोग अतप्त कर्मण में मृदुकरण करने के लिए होता है।

मोचन अनीलन (Relief annealing)– एक अल्प ताप अनीलन प्रक्रम जो धातु की बनी वस्तुओं से आंतरिक विकृतियों को दूर करने के लिए उपयुक्त होता है। ये विकृतियाँ ठंडा करने, यांत्रिक कर्मण अथवा अन्य क्रियाओं से उत्पन्न होती हैं। इसमें धातु को क्रांतिक ताप परास की निचली सीमा तक गरम करने के बाद धीरे-धीरे ठंडा किया जाता है। यदि बड़े कण विद्यमान हों और धातु में अधिक मृदुता अपेक्षित हो तो वस्तु को निचले क्रांतिक बिंदु से अधिक ताप तक गरम करना चाहिए जो कण-संरचना के परिष्करण के लिए पर्याप्त हो।
स्व-अनीलन (Self annealing)– जब बड़े संचकों का मंद शीतलन किया जाता है या जब अनेक गर्म वस्तुओं को ढेर रूप में इकट्ठा किया जाता है तो उनके यांत्रिक गुणधर्मों में ह्रास हो जाता है। इन प्रक्रम को स्व-अनीलन कहते हैं।
गोलाभन अनीलन (Spheroidize annealing)– इस्पात में गोलभीय कार्बाइड उत्पन्न करने के लिए उसका तापन तथा तत्पश्चात शीतल करना।

देखिए– Spheroidizing भी।

प्रतिबल मोचन अनीलन (Stress relief annealing)– एक अनीलन प्रक्रम जिसमें धातुओं को उचित ताप तक गर्म कर पर्याप्त समय तक उसी ताप पर रखा जाता है ताकि उनके अवशिष्ट प्रतिबलों में कमी हो जाए। तत्पाश्चात उन्हें धीरे धीरे ठंडा किया जाता है जिससे नए अवशिष्ट प्रतिबल कम से कम उत्पन्न हों।

Anode corrosion efficiency

एनोड संक्षारण दक्षता
किसी ऐनोड के वास्तविक संक्षारण और सैद्धांतिक संक्षारण का अनुपात। सैद्धांतिक संक्षारण का परिकल्प वैद्युत रासायनिक अभिक्रिया में प्रयुक्त विद्युत मात्रा से किया जाता है।

Anode effect

ऐनोड प्रभाव
संगलित लवणों के विद्युत अपघटन में एनोड के ध्रुवीकरण से उत्पन्न प्रभाव। इसमें एनोड के गैस फिल्म द्वारा विद्युत अपघट्य से पृथक हो जाने के कारण वोल्टता में एकाएक वृद्धि हो जाती है और तदनुसार ऐम्पियरों में कमी हो जाती है।

Anode effieciency

ऐनोड दक्षता
ऐनोड के धुलने की वास्तविक दर और फैराडे नियम द्वारा प्रयुक्त सैद्धांतिक दर का अनुपात। इसे प्रायः प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है।

Anode mud

ऐनोड पंक
देखिए– Anode slime

Anode slime

ऐनोड अवपंक
विद्युत-अपघटनी परिष्करण प्रक्रमों में ऐनोड पर बचा हुआ या गिरकर जमा होने वाला अविलेय अवशिष्ट। यह सूक्ष्म चूर्णित अविलेय धातुओं तथा विलेय ऐनोड के पृष्ठ पर बनने वाले धातु यौगिकों का मिश्रण होता है। इसे ऐनोड पंक भी कहते हैं।

Search Dictionaries

Loading Results

Follow Us :   
  Download Bharatavani App
  Bharatavani Windows App